جمعرات، 5 فروری، 2026

विवाह के 7 फेरे और 7 मंत्र

विवाह के 7 फेरे और 7 मंत्र हिंदू विवाह संस्कार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यह फेरे और मंत्र वर और वधू के जीवन को सुखी और समृद्ध बनाने के लिए पढ़े जाते हैं।

*विवाह के 7 फेरे और 7 मंत्र:*

1. *पहला फेरा और मंत्र:*
"ॐ अन्नं प्रजां प्रजननं बलं च सन्ततिमिष्टामव आयुरो राचीत्।
अग्निर्दाता वरेण्यो वृणीतु मायुष्मान्नवो नवते दम्पतिभ्याम्।।"
यह मंत्र अन्न और प्रजा की वृद्धि के लिए पढ़ा जाता है।

2. *दूसरा फेरा और मंत्र:*
"ॐ आयु प्रजां प्रजननं वीरं बलं पुष्टिं पशूनां ददमानो अग्नि:।
मित्रस्त्वष्टा प्रजया सचेत रायस्पोषमविता भवताद्दम्पत्यो:।।"
यह मंत्र आयु और बल की वृद्धि के लिए पढ़ा जाता है।

3. *तीसरा फेरा और मंत्र:*
"ॐ इष्टान्भोगान् हि वोढवा च नो विभु: कामानुकूलेषु च वीतु वामम्।
प्रजां पशूंश्च सधमाधमन्नः प्रजावती: सुमनस: स्याम।।"
यह मंत्र सुख और समृद्धि की कामना के लिए पढ़ा जाता है।

4. *चौथा फेरा और मंत्र:*
"ॐ सा नो अग्रे प्रथमस्य प्रजावति रायस्पोषमवीतु विश्ववारस्य।
मा वयं वृक्षस्य रेरिो वयं स्याम पतयो वनीनाम्।।"
यह मंत्र सुख और समृद्धि की प्राप्ति के लिए पढ़ा जाता है।

5. *पांचवां फेरा और मंत्र:*
"ॐ प्रजापतये स्वाहा नम: प्रजाभ्य: स्वाहा नम:।
कृष्णाय स्वाहा नम: कूर्माय स्वाहा नम:।।"
यह मंत्र प्रजा और पशुओं की वृद्धि के लिए पढ़ा जाता है।

6. *छठा फेरा और मंत्र:*
"ॐ ऋतंच सत्यं चाभीद्धात्तपसोऽध्यजायत।
ततो रात्रिरजायत तत: समुद्रो अर्णव:।।"
यह मंत्र ऋतुओं के परिवर्तन के लिए पढ़ा जाता है।

7. *सातवां फेरा और मंत्र:*
"ॐ सखा सप्तपदी भव सखा मे सखा गच्छ स्वाहयै।
सखित्वं सौभगत्वं विद्धि मामनुव्रता भव।।"
यह मंत्र वर और वधू के बीच सदा के लिए साथ निभाने के लिए पढ़ा जाता है।

*विवाह के 7 फेरे और 7 मंत्र का महत्व:*

- यह फेरे और मंत्र वर और वधू के जीवन को सुखी और समृद्ध बनाने के लिए पढ़े जाते हैं।
- यह फेरे और मंत्र वर और वधू के बीच प्रेम और विश्वास को बढ़ाते हैं।
- यह फेरे और मंत्र वर और वधू को एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने के लिए प्रेरित करते हैं।

विवाह के 7 फेरे और 7 मंत्र हिंदू विवाह संस्कार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और वर और वधू के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना के लिए पढ़े जाते हैं।

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