جمعرات، 5 فروری، 2026

Narsigh Zanjira manter

ॐ नमो भगवते महावलपराक्रमाय नृसिंहाय, भूतप्रेत पिशाच, शाकिनी-डाकिनी, याक्षिणी, पूतना, मारी-महामारी यक्ष-राक्षस, भैरव-वेताल ग्रह राक्षसादिकं, क्षणेण हन हन, भंजय-भंजय, मारय-मारय, क्षय-शिक्षय महाविष्णुवतार हूँ फट् स्वाहा। ॐनमो भगवते नृसिंहायदाख्या उग्रनृसिंह सर्वनदुष्ट मुखस्तम्भनं कुरु कुरु क्षां क्षीं क्षौं फट् स्वाहा।, ॐ नमो भगवते विष्णुवतार सर्व जन नन्दाय जोगी सन्यासी प्रकाशकाय हिराण्क्ष हिरण्याकश्यपसाधकाय प्रह्लाद भक्ताय वशाय गम्भीर शब्दोदाय नरसिंह मुखाय, वज्रनखाय पीतवर्णाय क्षां क्षीं क्षौं सर्वदुष्ट निवारण फट् स्वाहा ॥ ॐनमो भगवते नृसिंहाय सर्वग्रहान भूताभविष्यद्वर्तमानान्दूरस्थान समीपस्थान सर्वकालदुष्ट दुर्बुद्धीनच्टायोचाटय परवलानि क्षोभय - क्षोभय मम् सर्व कार्य साथय नृसिंहाय ॐक्षां क्षीं क्षी फट् स्वाहा ।। ॐशिवं ॐ सिद्धि ॐ फट् स्वाहा, ।। ॐनमो भगवते नृसिंहाय परकृत यंत्र परऽहंकार भूत प्रेत पिशाच पर दृष्टि सर्वविघ्न दुर्जन चेटक विद्या सर्व ग्रहानिवाराय वध-पच-पच, इल-इल, चिलु-चिलु,

किल-किल सर्वकुयन्त्राणि

दुष्टवाचं फट् स्वाहा ।॥ ॐ नमो

भगवते नृसिंहाय पाहि-पाहि,

एहि-एहि, सर्वग्रह भूतानां

शाकिनी-डाकिनी नाम विषम

दुष्टानाम् सर्वविषयानकर्षयाकर्षय

मर्दय-मर्दय, भेदय-भेदय

मृत्युमुत्पाटयोत्पाटयः

शोषय-शोषय, ज्वल-ज्वल,

प्रज्वल-प्रज्वल, भूत मंडल

प्रेतमंडलम्, निरासय-निरासय,

भूत ज्वर प्रेतज्वर, चातुर्थिकज्वर,

विषमज्वर, माहेश्वरज्वरान छिन्द्धी

छिन्च्छी, भिन्धि-भिन्धि, अक्षशूलवक्षशूल, शिरोशूल, गुल्मशूल, पितशूल ब्रह्मराक्षस कुल, परकूल नागकुल विषम् नाशये-नाशये निर्विषम् कुरू कुरू फट् स्वाहा। ॐ क्षौं सर्वदुष्टग्रहनिवारय फट् स्वाहा ।। ॐ नमो नृसिंहाय नरसिंह मुखाय हन-हनानय, दृष्टया पापदृष्टिं षठदृष्टि हन हन, नृसिंहाय ज्ञाय स्फुर-स्फुर फट् स्वाहा

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