اتوار، 23 جون، 2024

त्रिकाल संजीवन गायत्री मंत्र

त्रिकाल संजीवन गायत्री मंत्र :-इस गायत्री मंत्र का प्रभाव बहुत प्रभावी और अत्यंत लाभ प्रद हैं तथा यह सौम्य मन्त्र हैं इस मन्त्र का जप कोई भी कर सकता हैं नर नारी दोनों भी कर सकते है

सतनमो आदेश।श्रीनाथजी गुरुजी को आदेश।ॐ गुरुजी ओउम सोहंम अमर योगी अमर काया।अमर लोक से उतरी माया।ब्रम्हा विष्णु महेश रचाया।हाड़ चाम की मढ़ी पवन अलील की काया।गलें नहीं हाड़ सड़े नहीं चाम स्थिर रहें योगी की काया।त्रिकाल संजीवन गायत्री मंत्र देवाधिदेव महादेव जी ने गौरां पार्वती को कान में सुनाया।कहे गुरु गोरक्ष नाथ जी सुनो नवनाथ चौरासी सिद्धों अमर किन्हीं गौरां पार्वती माई की काया।मरें नहीं गौरां पार्वती माई।आवें न जावें।कहाँ से उत्पन्नी गौरां पार्वती माई।कहाँ से उत्पन्नी सुरें।कण्ठ से उत्पन्नी गौरां पार्वती माई।शीश से उत्पन्नी सुरें।रूपवंती एक जन्म।सत्यवन्ती दो जन्म।शीलवंती तीन जन्म।चण्डी चार जन्म।पृथ्वी पांच जन्म।क्षमा छठे जन्म।सावित्री सात जन्म।नवदुर्गा नवें जन्म।गर्भवन्ती दसवें जन्म।मुले असल कहन्ती।मूलवन्ती देवी।माई पात्र कृष्ण वर्णी।ऋद्धि सिद्धि के भंडारे भरन्ती।काल कण्टक को भस्म करन्ती।देव दानवों को प्रताड़ित करन्ती।गो हत्या,जीव हत्या, स्त्री हत्या, ब्रम्ह हत्या, अन्न हत्या दोष हरन्ती।योगी के कुल से इकोत्तर सो पुरुषां ले अमरापुर तरन्ती।पिण्ड प्राण की रक्षा करन्ती।राख राख माता त्रिकाल संजीवन गायत्री राख।अघोर पिण्ड पड़न्ता राख।ब्रम्हा विष्णु महेश भरें सांख।तेरा दिया शिवपुरी में वास।इस प्राणी को अन्त काल में कभी न भक्षय काल अकाल।चार मुख द्वारा सुमिरण करें।चार प्रहर वेद न झरें।अम्बर मुख झरें।धरती मुख फलें।पान फूल गऊ मुख द्वारा चरें।मूल द्वारे गोबरी करें।भग द्वारें गंगा यमुना सरस्वती का नीर झरें।महादेव जी भर लाये कर्म कमण्डल विष्णु जी भर लाये जल।गौरां पार्वती माई चौका लगायें।गुरु गोरक्षनाथ जी घन चक्र पुरें।ब्रम्हा जी चार वेद का पाठ करें।सात जन्मों का पाप कटें।लख चौरासी जिया जून से फेरा टलें।अवधूत दत्तात्रेय नाथ जी त्रिकाल संजीवन गायत्री मंत्र का जाप जपन्ते।गौरी नन्द गणेश ऋद्धि सिद्धि का भण्डार भरें।काली पुत्र काल भैरव काल अकाल मृत्यु से निर्भय करें।अंजनी सुत हनुमान संकट हरे।प्रातः काल जपे अष्ट सिद्धि नवनिधि पावें।मध्यांहः काल जपे मोक्ष मुक्ति फल पावें।संध्याह्न काल जपे शिवपुरी में जावें।इतना त्रिकाल संजीवन गायत्री मंत्र जाप सम्पूर्ण भया।गंगा गोदावरी त्र्यम्बकं क्षेत्र कोलागढ़ पर्वत की अनुपान शिला पर सिद्धासन बैठ श्री सदाशिवः शम्भुजति गुरु गोरक्ष नाथ जी ने नवनाथ चौरासी सिद्ध बारह पँथ अनन्त कोटी सिद्धों को पढ़ कथ कर सुनाया।श्रीनाथजी गुरुजी को आदेश।आदेश।आदेश।

بدھ، 12 جون، 2024

विदया पलटने का काल भैरव मंत्र

ॐ काला भैरव कल कल करे रक्त मास को भोजन करे काल सब भैरव काल को धरे लोहे की कमान बज्र को बान जिसे चलाबे वीर बलवान, भैरव बाण चल चल भैरव कलिका की आन वादी को वाद मारे भूत प्रेत को जलाव इंद्र को आसन हिलाओ शत्रु को खून जलाव मद पीयो फिर गुर्राये मारण मूठ तंत्र मंत्र बाण लोट पलट घर जाए जिसका भेजा उसी को खाय फिर हंकार लगाए मेरी भक्ती गुरु की सक्ति मंत्र फूरे दुहाई माता काली की

भूत प्रेत को बहकाने का मंत्र

खिली खिली निम्बू ख़म ख़म पान क्रिया भैरव वीर मसान‌

विधी इस मंत्र को निम्बू पर २१बार पढ़कर भूत गिरसत रोगी की जिव्हा पर निम्बू काट कर निचोड़ दें सबकुछ बकबक कर बताएगा

بدھ، 29 مئی، 2024

Havan vidhi

हमारे हिन्दू धर्म में यज्ञ और हवन को एक बड़ा ही विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसा कहा जाता है की यज्ञ के माध्यम से ही सभी देवी देवताओं को आहुति प्राप्त होती है और हमें उनका आशीर्वाद मिलता है। हिन्दू धर्म के रीती रिवाज को मानें तो हर मानव जाती के हरेक इंसान को अपनी जिंदगी में एक बार कम से कम यज्ञ और हवन जरूर करना चाहिए। पुराने समय में प्रत्येक घर में हवन का आयोजन किया जाता था।     - Advertisement - यज्ञ के लिए हवन करने की प्रक्रिया और विधि : सबसे पहले तो आपको यज्ञ के हवन से पहले उसके सभी नियमों का पालन करना होता है। यज्ञ से पहले स्वयं को अच्छी तरह से नहा कर स्वच्छ कर लें। अगर पति और पत्नी दोनों एक साथ यज्ञ में एक साथ बैठ रहे हैं तो कुछ महायज्ञ में पत्नी का घी की आहुति देना वर्जित होता है, बाकी सभी आहुति दोनों एक साथ दे सकते हैं। हालाँकि अगर आप दैनिक रूप से आहुति दे रहे हों तो पत्नी भी घी की आहुति दे सकती है। इसके साथ एक मिट्टी का हवन कुंड भी बनाएं जिसे गाय के गोबर और मूत्र से लीप लें। हालाँकि अगर आप यह नहीं उपाय कर पा रहे तो एक ताम्बे का यज्ञ कुंड खरीद लें। हवन के दौरान सभी मंत्र का उच्चारण पूरी शुद्धत्ता और सावधानी से करें। साथ ही हवन भूमि पर ही करें, किसी प्रकार के चौकी या किसी और वस्तु का उपयोग ना करें। यज्ञ के लिए आवश्यक चीजें आपको बड़ी आसानी से बाजार में मिल जाएँगी। हवन मंत्र हिंदी में । Hawan Mantra in Hindi हवन में दी जाने वाली आहुति के लिए मंत्र : हवन के शुरुआत में सबसे पहले पांच प्राणों को आहूत दी जाती है, उसके लिए आपको इन मंत्रों का उच्चारण करना होता है – 1. ॐ प्राणाय स्वाह: 2. ॐ व्यानाय स्वाह: 3. ॐ अपानाय स्वाह: 4. ॐ समानाय स्वाह: 5. ॐ उदानाय स्वाह: पांच प्राणों की आहुति के बाद आपको इन मंत्रों के साथ आहुति दें – 1. ॐ प्रजापतये स्वाहा इदम प्रजापतये नम: 2. ॐ अग्नये स्वाहा इदम अग्नये नम: 3. ॐ ब्रम्हणे स्वाहा इदम ब्रम्हणे नम: 4. ॐ सोमाय स्वाहा इदम सोमाय नम: इसके बाद प्रथम पूज्य भगवान गणेश जी को इस मंत्र के साथ आहुति दें – ॐ गं गणपतये नम: स्वाहा गणेश जी की आहुति के बाद माँ जगदम्बा यानी माँ दुर्गा को ये तीन आहुति प्रदान करें – 1. ॐ अम्बाय स्वाहा 2. ॐ अम्बिकाये स्वाहा 3. ॐ अम्बलिकाये स्वाहा तत्पश्चात्य इन मंत्रों के साथ माता लक्ष्मी को आहुति दें – 1. ॐ श्री लक्ष्मी नम: स्वाहा 2. ॐ भूलक्ष्मी नम: स्वाहा 3. ॐ महालक्ष्मी नम: स्वाहा इसके बाद इन मंत्रों के जाप के साथ नवग्रहों को आहूत दें – 1. ॐ सूर्याय नम: स्वाहा 2. ॐ सोमाय नम: स्वाहा 3. ॐ भोमाय नम: स्वाहा 4. ॐ बुधाय नम: स्वाहा 5. ॐ गुरवे नम: स्वाहा 6. ॐ भृगवे नम: स्वाहा 7. ॐ शनिश्चराये नम: स्वाहा 8. ॐ राहवे नम: स्वाहा 9. ॐ केतवे नम: स्वाहा इसके साथ ही अगर आप चाहें तो  रामायण की चौपाई का पाठ करते हुए भी आहुति दे सकते हैं। हर यज्ञ में त्रिदेव की आहुति सवयं ही निर्धारित होती है, उसके लिए आपको किसी खास मंत्र का जाप नहीं करना होता। अगर आप फिर भी करना चाहें तो त्रिदेव के बीज मंत्र के साथ उनको आहुति दे सकते हैं। हवन से होने वाले लाभ और इसकी विशेषता : हवन का सबसे बड़ा लाभ होता है की इससे हमारे आसपास का वातावरण शुद्ध होता है। साथ ही हवन के माध्यम से हमारे पितरों यानी पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। हवन में आहुति देने से सभी देवी देवताओं की कृपा हम पर बरसती है और हमारा जीवन सुख शांति से परिपूर्ण रहता है।

پیر، 15 اپریل، 2024

सिध्द शाबर रक्षा मंत्र |

सिध्द शाबर रक्षा मंत्र |

मंत्र -

ॐ नमो आदेश गुरू को, अजर बांधू बजर बांधू, बांधू दशो द्वार, आण पडी हनुमान की, रक्षा राम की कार पहली चौकी गज गणपति की दूजी चौकी विकट वीर हनुमान तीजी चौकी भूमिया भैरव चौथी चौकी नरसिंह की आण इस चौकी को जो कोई लांघे तुरतही धूल भसम हो जावे दुश्मन बैरी जो कोई करे उलट फेर उसी के माथे परे शब्द सांचा पिंड कांचा फुरो मंत्र ईश्वरी वाचा

हनुमान जी को प्रसन्न करने का

हनुमान जी को प्रसन्न करने का

|| मन्त्र ||

अरे-अरे अंजनी कुमारा? मास्मार। जाल-जाल ॥ कोट-कोट ॥ बन्द-बन्द ॥ पूर्व-बन्द । पश्चिम बन्द ॥ उत्तरबन्द । दक्षिण-बन्द ॥ आकाश-बन्द । पाताल-बन्द ॥ ताल के देव बन्द । शब्द सांचा ॥ फुरो मन्त्र ॥

पिण्ड कांचा।

ईश्वरो वाचा ॥

॥ विधि ॥

सर्व प्रथम इस मन्त्र को ग्रहण-काल में 11 माला जप कर सिद्ध कर लें, हनुमान जी विषयक सभी नियमों का पालन करते हुए हनुमान मन्दिर या उनकी प्रतिमा स्थापित कर प्रतिदिन यथा शक्ति पूजन तथा 10 माला का जप एवं दशांश हवन करें, यह क्रिया नित्य करते रहने से कुछ ही दिनों में हनुमान जी प्रसन्न होकर साधक की मनोकामना पूर्ण करते हैं।

सर्व-कार्य सिद्धि दाता हनुमान

सर्व-कार्य सिद्धि दाता हनुमान

|| मन्त्र ||

ॐ विनायक कण्ठा बेठो आय। सबके पहली सिमर सूँ भूल्या ॥ राय बताय, अंजनी-पुत्र, पवन-। पुत्र, सूद-पुत्र, मैं हुंकारु ॥ जद ही आओ, मेरा काम। सिद्ध कर ल्यावो, हनुमान। बजर की काया, जद हुँकाएँ। जद ही धाया, मैं जाणू पारी-॥ जातः, तू जलम्यो अमावस । की रातः. लूंग-सुपारी-जायफल-॥ तीनू पूजा लेय, सीध पैरूँ । बैठ के तीधारा खाण्डा लेय ॥ अटक-अटक लंका-सा कोट । समुद्र-सी खाई, लोह की कील ॥ बजर का ताला, आ बैठ हनुमन्त । वज्र रखवाला, आव हनुमन्त । जल्दी आव, हमारा काम सिद्ध। करि ल्याव, शब्द सांचा। पिण्ड कांचा ॥ चलो मन्त्र, ईश्वरो वाचा ॥

॥ विधि ॥

इस मन्त्र का अनुष्ठान 41 दिन का है, साधक श्री हनुमान जी विषयक सभी नियमों का पालने करते हुए प्रतिदिन एक माला का जप व दशांश हवन करें तो यह मन्त्र सिद्ध होगा।

यह अनुष्ठान किसी भी मंगलवार से शुरु कर सकते हैं। अब आप किसी .कार्य के शुभारम्भ में या किसी अन्य कार्यों के समय इस मन्त्र की एक माला जपें तो समस्त कार्य निर्विघ्न सम्पन्न होंगे।

सिद्ध हनुमान

सिद्ध हनुमान

॥ जंजीरा ॥

ॐ वीर बज्र हनुमताय नमः चलो राम दूताय नमः चलो बाँध लोहे का गदा वज्र का कछौटा पान-तेल-सिंदूर की पूजा ओं खं खं खं खट पवन पतंग। ओं चं चं चं कहसि कुबेर भैख कील, मसान कील। देव कील, दानव कील, दैत्य- कील, ब्रह्म-राक्षस कील। छल-छिद्र मेंद कील, नाफ- की तिजारी कील, देव-अचल- चल कील, पृथ्वी कील, मेघ- कील, मेरे ऊपर घात करे। छाती फाट के मरें, माता- अंजनी की दुहाई, सूर्य-वंशी- राजा राम चन्द्र की दुहाई। जती लक्ष्मण की दुहाई। शब्द साँचा, पिण्ड काँचा। फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा ॥


॥ विधि ॥

यह सिद्ध हनुमान जंजीरा है, जो साधक इस जंजीरे का नित्य जाप श्री हनुमान जी विषयक सभी नियमों को ध्यान में रख श्रद्धा से करता है। तो श्री बजरंगी जी की साधक पर असीम कृपा बनी रहती है तथा उसके समस्त संकट नाश होते हैं।

हनुमान जी का सिद्ध

हनुमान जी का सिद्ध

॥ जंजीरा ॥

ॐ गुरु जी हनुमन्ता बलवन्ता जेने तात तेल चडन्ता जे बर आवे मार मार करन्ता ते नर पाय पड़न्ता इन्ह कहाँ से आयो ? मेरु पर्वत से आयो कोण लायो ? गौरीपुत्र गणेश लायो कोण के काज ? वीर हनुमान के काज हनुमान बंका मारे डंका गुरु चोट अकणी-साकणी माथे हाँक बगाडे वीर हनुमन्ता कागज-पत्र-शैल-झोल मोल जती-सली की मदद मति संज्ञा माथे फारगती चल-चल कर जहाँ पड़े डेरी पड़े जले थले नवकुल बाँन की आज्ञा फिरे मेरा शब्द फिरे। श्री रामचन्द्र की आज्ञा फिरे सबद सांचा, पण्ड कांचा फुरो मन्त्र ईश्वरी वाचा

इल-इल-महा-इलबोलते की जीभ कील चलते का पाँव कील मारने का हाथ कील देशाते की नजर कील मुए की कबर कील भूल बाँध, पलील बाँध बोधने वाला हनुमान कहाँ से आया? कली कोट से आया सब हमारा विष्ण दस्ता आया जैसा रामचन्द्र का काज सुधार्या तेसा काग हमारा सुधारो मेरा माध्य फिरे श्री रामचन्द्र की आज्ञा फिरे शब्द सांचा, पण्ड कांचा फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा

उत्तर साण्ड से जोगी आया साथे हनुमान वीर लाया अताल बाँधू, पाताल बाँधू पर मन बांधू चार मन बाँधु चोरा बाँधू, चींटा बाँपू भूत बाँपू, चींटा बाँपू भूल बाँधू, पलीत बापू डाकनी बाँधू, साकणी बाँपू बर मन्सरक बाला रावण बाँधू सबब सांचा, पण्ड कांचा चाली मन्त्र ईश्वरी वांचा

॥ विधि ॥

इस जंजीरे का नित्य हनुमान विषयक नियम मानते हुए जप करने से श्री हनुमान जी साधक की सर्प-प्रकार से रक्षा करते हैं तथा उसकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

स्नान मंत्र

गायत्री

गोरखनाथ जी स्नान मंत्र ,अलील गायत्री ,शिव गायत्री 

सत नमो आदेश | आदेश गुरूजी को आदेश |

 ॐ  गुरु जी जल का दान ,जल का स्नान ,जल में ऊना ब्रह्मज्ञान |

 जल ही आये जल ही जाये ,जल ही जल में रह्या समय |

जल ही ऊँचा जल ही  नीचा ,उण पाणी सौ लीजे सींचा |

भुख्याकू  कु अन्न  प्यासे को पाणी ,जहाँ आये गुरु गोरख निर्वाणी |

 पीना पाणी उत्तम जात , जैसा दीवा वैसी बात |

जल में ब्रह्मा जल में शिव जल में शक्ति जल में जीव |

जल में धरती जल में आकाश जल में ज्योति जल में प्रकाश |

जल में निरंजन अवगति रूप ,जगी ज्योत अटल अनूप |

जहा से अपनी शिव गायत्री | तार तार माता शिव गायत्री |

अघोर पिंड पंडता रख ब्रह्मा विष्णु महेश्वर साख |

जपो शिव गायत्री ,सरे प्राणी पावै मोक्ष द्वार |

जोगी जपै जोप पैट ध्यावै राजा जपै राजपद पावै|

 गृही जपै भंडार भर्ती धुधपूत सत धर्म फलती |

जो जग फल मांगू फल होय ,शिव गायत्री माता सोय |

इतना शिव गायत्री मंत्र सम्पूर्ण भया |

गंगा गोदावरी त्र्यम्बक क्षेत्र कौलागढ़ पर्वत अनुपान शिला कल्पवृक्ष 

तहा गादी पर बैठे श्री शम्भू जति गुरु गोरखनाथ ने नौ नाथ चौरासी सिद्ध अनंत कोट सिद्धो को कथा  पढ़ कर सुनाया |

सिद्ध गुरुवरों को आदेश | आदेश | आदेश |

ہفتہ، 6 اپریل، 2024

सिध्द शाबर रक्षा मंत्र |

सिध्द शाबर रक्षा मंत्र |

मंत्र -

ॐ नमो आदेश गुरू को, अजर बांधू बजर बांधू, बांधू दशो द्वार, आण पडी हनुमान की, रक्षा राम की कार पहली चौकी गज गणपति की दूजी चौकी विकट वीर हनुमान तीजी चौकी भूमिया भैरव चौथी चौकी नरसिंह की आण इस चौकी को जो कोई लांघे तुरतही धूल भसम हो जावे दुश्मन बैरी जो कोई करे उलट फेर उसी के माथे परे शब्द सांचा पिंड कांचा फुरो मंत्र ईश्वरी वाचा

(2)

तंत्र बाधा नाशक मंत्र :

ॐ नमो आदेश गुरु को वज्र का कोठा, वज्र का ताला, वज्र से बाँधू दसो द्वारा, यहाँ वज्र का लगा किवाड़ा, वज्र की चौखट, वज्र की कील, जहां से आया, तहां ही जावे, जिसने भेजा, उसको खाए, अपना मुख फिर न दिखाए, हाथ को, नाक को, सिर को, पीठ को, कमर को, छाती को, मेरे इस काया पिंड को यदि कष्ट पहुंचाये तो गुरु गोरखनाथ के धुनें में जले, मेरी भक्ति गुरु की शक्ति, फुरो मंत्र ईश्वरोवाचा

(3)

शत्रु उच्चाटन

मंत्र

ॐ एक ही आदि है जग धारा सदा स्मरण करूं ओंकारा

औमकार से मैं काम चलाऊं

ठहरे पर्वत मैं हिलाऊं 

ओमकार से उपजी वायु ।

वायु का बेटा है हनुमान ।

तेरा हूँ मैं एक ही दासा ।

सदा रहो रघुवर के पासा ।

पान बीड़ा तुझे चढ़ाऊं ।

देववत्त को मैं भगाऊं ।

मेरा भागा न भगे ।

रामचन्द्र की दुहाई ।

सीता सत्यवंती की दुहाई 

लक्ष्मण यती की दुहाई ।

गौरा पार्वती की दुहाई ।

منگل، 26 مارچ، 2024

हमजाद सिद्ध करने का मंत्र

हमजाद सिद्ध करने का मंत्र

"आगम निगम की खबर लगावे सोऽहं पारब्रह्म को नमस्कार।"


इस मंत्र को चालीस दिनों तक प्रतिदिन 25000 दफा जाप करने से हमजाद सिद्ध हो जाता है। इस सिद्धि को प्राप्त कर लेने के पश्चात् साधक एक स्थान पर बैठे- बैठे ही दूर देशों तक का हाल पता कर सकता है।


हाजरात का सिद्धि मंत्र


"काला भेरूं काला काल काला भेज्या चारों धाम काल्या काला कहाँ गया भेंने भेज्या वहाँ गया कौन को दिखाए भगे भगाए को रूठे रुठाय को धरती में दबे धन माल को देव दानव को चोर चौपाए को जहाँ के तहाँ को न बताए तो माता कालिका के खप्पर में जरे मेरी भक्ति गुरू की शक्ति।"


इस प्रयोग में बालक/बालिका ही का भी प्रयोग किया जा सकता। इस विशेष काजल को हथेली में वृत्ताकर एक रुपये के सिक्के के बराबर गोलाई में लगाया जा सकता है अथवा नाखून पर भी लगाया जा सकता है। आरम्भ में कज्जल वृत्त में प्रकाश की किरणें फूटती हैं फिर नाग के दर्शन होते हैं। नाग को प्रणाम कर उससे अपना मनोरथ कहना चाहिए। इसके पश्चात् नाग चलता हुआ या उड़ता हुआ चाहे गए स्थान तक जाकर सम्बन्धित बात को दिखाएगा। इस प्रयोग से गुप्त निधि, खोए की तलाश आदि को ज्ञात किया जा सकता है। इस 'हाजरात काजल' को प्राप्त करने के लिए आप हमारे केंद्र से सम्पर्क कर सकते हैं।

हाजरात सिद्धि के लिए कालिका सिद्ध


|| मन्त्र ॥

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं हाजरात-सिद्धि कुरु कुरु स्वाहा ।।


॥ विधि ॥

इस मंत्र का मंगलवार से जप आरम्भ कर 21 दिन में 21000 बार जप विधि-विधान सहित करें, फिर इस मंत्र का दशांश हवन चमेली के फूल और कपूर मिला कर करें तो यह मन्त्र सिद्ध होगा।


फिर पूर्व में वर्णित हाजरात की ही विधि से बालक द्वारा प्रश्न पूछ लें।

हजरात बंगाली कालिका सिद्ध


॥ मन्त्र ॥

ॐ काली माता। काली माता।


ओतो ते ॥


॥ विधि ॥

इस मंत्र का 21 दिन में इक्कीस हजार जप विधि-विधान सहित करने से यह मन्त्र सिद्ध होगा। फिर कपूर का काजल बनाकर उसमें कुछ बूँदे चमेली के सुगंधित तेल की डाल कर उस काजल को सम्भाल कर रखें, आवश्यकता के समय जिस दिन आकाश साफ हो तो सुबह आठ बजे से पहले किसी 11 वर्ष के बच्चे को आसन पर बिठा कर, इस मंत्र से गुड़ 21 बार अभिमंत्रित कर उसे खिलायें, फिर उसके दाहिने हाथ के अंगूठे पर काजल वाली स्याही लगा दें और बच्चे को उस काजल को ध्यान से देखने को कहें, जब लड़का उस अंगूठे पर ध्यान एकाग्रचित करेगा तो उसे एक मैदान दिखाई देगा उसमें कुछ आकृतियां दिखाई देंगी। तब लड़का कहे कि भंगी हाजिर हो तो अंगूठे वाले मैदान में भंगी आ जायेगा, तो लड़का उसे झाड़ लगाने को कहे, जब झाडू लगाकर खड़ा हो जाये तो लड़का कहे भंगी साब आप जाये और पानी छिड़काव करने वालों को भेजें, जब पानी छिड़काव करने वाला आ कर खड़ा हो जाये तो उसे लड़का पानी छिड़कने को कहे जब वह पानी छिड़ककर खड़ा हो जाय तो उसे लड़का आदेश करे कि आप जायें और फर्श लगाने वाले को भेजें। जब फर्श लगाने वाला आकर फर्श लगादे और सिंहासन स्थापित कर दे तो उसे कहे आप जाए और मुंशी जी या पण्डित जी को बुलायें। जब वह मुंशी जी को साथ लेकर पधारें तो बालक उसने निवेदन करे कि मैं कुछ प्रश्न पूछना चाहता हूँ क्या उप इसके लिए तैयार हैं ? तो वह जब हाँ में सिर हिलाए तो लड़का मुंशी को कहे कि माँ कालिका जी को आदर सहित सिंहासन पर लाए। जब माँ कालिका सिंहासन पर बिराजे तो लड़का माँ कालिका को 11 रुपये फल-फूल, मिठाई, अगरबत्ती से उनकी पूजा कर, जो प्रश्न मुंशी जी से पूछना चाहे पूछे। मुंशी जी माँ कालिका से उत्तर पूछ कर बालक को हाँ या ना में जवाब देंगे या बालक मुंशी जी से निवेदन करेगा कि मुझे इस भाषा में लिखकर उत्तर दो तो मुंशी स्लेट पर लिखकर भी उत्तर देगा। प्रश्नों का उत्तर प्राप्त करने के बाद माँ कालिका की सवारी को वापिस जाने का निवेदन करें। इस प्रयोग से साधक हर प्रकार के प्रश्नों के उत्तर प्राप्त कर सकता है। इस प्रयोग को सिद्ध करने वाला साधक कभी किसी से रुपया- पैसा न ले तथा गुरु से दीक्षा प्राप्त कर इस सिद्धि को सम्पन्न करें।


جمعرات، 7 مارچ، 2024

सुख-समृद्धि दायक कालिका

सुख-समृद्धि दायक कालिका

|| मन्त्र ||

ॐ नमो आदेश गुरु को। सात भवानी कालिका ॥ बारह वर्ष कुमार। एक माई परमेश्वरी ।। चौदह भुवन द्वार। दो पक्ष निर्मली ॥ तेरह देवी-देव। अष्ट भुजी परमेश्वरी ।। ग्यारह रुद्रकर सेव । सोलह कला सम्पूर्णा ॥ तीन नयन भरपूर । दश अवतारी ॥ पाँच देव रक्षा करें। नव नाथा-चौरासी सिद्ध ॥ षट्-दर्शन पाइए । पन्द्रह तिथि जान ॥ चार वेद वखानिए। काली कर कल्याण ॥


॥ विधि ॥ इस मन्त्र का जो साधक नित्य सच्चे मन से माँ कालिका का ध्यान कर जप करता है वह संसार के सम्पूर्ण सुख प्राप्त करता है। उसको जीवन में किसी तरह का अभाव नहीं रहता है।


इस मन्त्र में महा कालिका के चौंतीस के यन्त्र की सम्पूर्ण विधि समाई हुई है इस लिए इस मन्त्र का जप कर झाड़ा करने से भूत-प्रेतादि दौषों का निवारण होता है।